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मैं सादगी के नूर से महकी ग़ज़ल बनी
तुम चाँदनी के चाँद से लगते तज़ीब हो
तुम चाँदनी के चाँद से लगते तज़ीब हो
खोई हुई तुम्हारी मोहब्बत जो मिल रही
सच में जनाब तुम तो बहुत ख़ुशनसीब हो
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भले ही आपने मुँह हम से मोड़ा हो
गुज़िश्ता पल हमें तो याद आते हैं
Read Fullगुज़िश्ता पल हमें तो याद आते हैं
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जहाँ बाम-ए-फ़लक पे चाँद चमका हो
वहाँ तारे भी अपना हक़ जताते हैं
वहाँ तारे भी अपना हक़ जताते हैं
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कभी फूलों की महफ़िल में ज़रा आओ
यहाँ आ कर मोहब्बत का असर देखो
यहाँ आ कर मोहब्बत का असर देखो
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