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दिल के एक गोशे में तीरगी है यादों की
और इस ज़माने में चार सू उजाला है
और इस ज़माने में चार सू उजाला है
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टूटे सपनों से मुझे रोज़ घुटन होती है
साँस लेता हूँ तो सीने में चुभन होती है
साँस लेता हूँ तो सीने में चुभन होती है
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अश'आर अधूरे हैं किरदार अधूरे हैं
मिलने के लिए आओ घर-बार अधूरे हैं
मिलने के लिए आओ घर-बार अधूरे हैं
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