जंग मैदान-ए-जंग में होगी
क़त्ल भी अब किसी को होना है
क़त्ल भी अब किसी को होना है
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हाथ में उस के अँगूठी नाक में थी उस के नथ
रात मुझ को देख कर वो ख़ूब शरमाती रही
रात मुझ को देख कर वो ख़ूब शरमाती रही
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कुछ नहीं तेरी सुनने वाले अब
तू लगा ले ज़बाँ पे ताले अब
तू लगा ले ज़बाँ पे ताले अब
सब के सब कब तलक यूँ बैठोगे
पाँव घर से कोई निकाले अब
जितना चाहे तराश डाले तू
ख़ुद को तेरे किया हवाले अब
ज़ुल्म तुम को नज़र नहीं आता
साफ़ आँखों के कर लो जाले अब
ज़ाइक़ा ही बिगड़ गया मुँह का
ऐसे महँगे हुए निवाले अब
मौत अब जान ले के छोड़ेगी
है कोई जो तुझे बचा ले अब
बुज़दिली अब नहीं दिखाऍंगे
हो गए हैं ज़फर जियाले अब
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मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन
ईद ऐसी बहार लाई है
ईद ऐसी बहार लाई है
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उम्र भर की मेरी कमाई हो
पास आ हिज्र रिहाई हो
पास आ हिज्र रिहाई हो
तू कोई तो दवा बता ऐसी
ज़ख़्म की जो मिरे दवाई हो
ज़िन्दगी भर ही ज़ख़्म झेले हैं
ज़ख़्म से काश अब जुदाई हो
शोहरतें क्यूँ नहीं मिलेंगी मुझे
हर तरफ़ मेरी भी बुराई हो
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
काश इस बह्र में रुबाई हो
एक पल भी बता मुझे ऐसा
जब 'ज़फ़र' ने ख़ुशी मनाई हो
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मैं ने बचा रखा है ईमान ज़िन्दगी में
दूँ साथ हक का है ये अरमान ज़िन्दगी में
दूँ साथ हक का है ये अरमान ज़िन्दगी में
मैं चल पड़ा मिटाने नफ़रत जहाँ से सारे
ये राह भी नहीं है आसान ज़िन्दगी में
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दाग़ समझे है ज़माना
चाँद हूँ माँ के लिए मैं
चाँद हूँ माँ के लिए मैं
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