वही खिड़की वही रस्ता हमारा
बहुत मशहूर था कि़स्सा हमारा
बहुत मशहूर था कि़स्सा हमारा
गुज़रते हैं गली से तेरी अब भी
बदलता ही नहीं रस्ता हमारा
उसी को हम चलो मज़बूत कर लें
बचा जैसा भी है रिश्ता हमारा
हमें ये डर सताये जा रहा है
तुम्हारे बा'द क्या होगा हमारा
तुम्हारे हाथ फूलों से भरें हैं
किताबों से भरा बस्ता हमारा
कभी हम भी किसी को याद आते
कोई तो रास्ता तकता हमारा
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आँख से जब तुम्हारी उतारे गए
जाँ बचानी पड़ी, जिस्म हारे गए
जाँ बचानी पड़ी, जिस्म हारे गए
हिज्र में तो तुम्हारे यही बस हुआ
रात काटी गई , दिन गुज़ारे गए
इश्क़ का भूत चढ़ने लगा था हमें
एक इक कर के हम यार सारे गए
चाँद पीछे तुम्हारे था पहले गया
धीरे धीरे से फिर ये सितारे गए
तितलियों को बुलाया गया और फिर
रंग फूलों से तेरे निखारे गए
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