जिस ने ज़ख़्मों को ही उभारा होसाथ उस के कहाँ गुज़ारा होचाँद कितना हसीन लगता हैसाथ में जब कोई सितारा होइक इशारे पे जान भी दे दूँकाश तेरा अगर इशारा होमुझ को डसने लगी है तन्हाईसाथ कुछ रोज़ अब तुम्हारा होहोश खो बैठे ये ज़फर अपनाइस क़दर हुस्न का नज़ारा हो— Zafar Siddqui