@zafarsiddiqui21
Zafar Siddqui shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zafar Siddqui's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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बात अब तीर की तरह होगी
शायरी मीर की तरह होगी
है फ़साना ज़फ़र का राँझा सा
दास्ताँ हीर की तरह होगी
ये तुम्हें क्या हुआ है क्या ग़म है
तुम बताओ तो आँख क्यों नम है
एक ही घूँट में शिफ़ा होगी
पीके देखो ये आब-ए-ज़मज़म है
तुम यक़ीं मत मशीन पर रखना
पाँव अपने ज़मीन पर रखना
वो ज़फ़र जाल में फँसाएगा
तुम नज़र उस हसीन पर रखना
जो अदब की है पहचान पढ़ता हूँ मैं
मीर-ओ-ग़ालिब का दीवान पढ़ता हूँ मैं
मत पढ़ाओ मुझे पाठ नफ़रत का तुम
अम्न जिस में है क़ुरआन पढ़ता हूँ मैं
वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा है
इश्क़ के भी आज फ़ेवर में दिखा है
हो गई काफ़ूर चेहरे की कशिश भी
हिज्र का ग़म उसके ज़ेवर में दिखा है
यार की यार से जुदाई है
हिज्र की याद से लड़ाई है
ग़म से मेरा उदास है बिस्तर
याद तेरी 'ज़फर' जो आई है
ख़्वाब ये जाने क्यों मुझ को शब आ गए
प्यासे लब पर मिरे तेरे लब आ गए
मैं तो मदहोश बाँहों में तेरी हुआ
दिन मिरे यानी अच्छे ही अब आ गए
कॉल पर कॉल हमदम करे है
राह दुश्वार मौसम करे है
बीच मझधार में फँस गया हूँ
आँख ये मसअला नम करे है
हुई है आँख क्यों पुर-नम समझ ले
ज़फ़र के प्यार को हमदम समझ ले
सही जाती नहीं फ़ुर्क़त तिरी अब
मिरे ग़म को तू अपना ग़म समझ ले
प्यास बुझती नहीं होंठ सूखे पड़े
हाल क्या हो गया ग़म के बाज़ार में
रात कटती है बिस्तर पे करवट में अब
चैन लूटा है तू ने सनम प्यार में
यूँ सितम उसने माँ पे ढाया है
माँ के ज़ेवर ही बेच आया है
चापलूसी है करता बीवी की
और माँ को फ़क़त सताया है
आँख से अपनी पिला दे
इश्क़ का कुछ तो नफ़ा' दे
होंठ हैं बीमार कब से
चूम कर इन को दवा दे
इश्क़ का यूँ जवाब लेना है
यानी उस से गुलाब लेना है
उसने तोहफ़े गिना दिए हैं ज़फर
अब तुझे भी हिसाब लेना है