वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा हैइश्क़ के भी आज फ़ेवर में दिखा हैहो गई काफ़ूर चेहरे की कशिश भीहिज्र का ग़म उस के ज़ेवर में दिखा है— Zafar Siddqui