ख़्वाब ये जाने क्यूँ मुझ को शब आ गएप्यासे लब पर मिरे तेरे लब आ गएमैं तो मदहोश बाँहों में तेरी हुआदिन मिरे या'नी अच्छे ही अब आ गए— Zafar Siddqui