
मैं ने बचा रखा है ईमान ज़िन्दगी में
दूँ साथ हक का है ये अरमान ज़िन्दगी में
मैं चल पड़ा मिटाने नफ़रत जहाँ से सारे
ये राह भी नहीं है आसान ज़िन्दगी में
— Zafar Siddqui
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