अगर मर ही न पाए तुम मुहब्बत में
तो फिर मर क्यूँ नहीं जाते नदामत में
तो फिर मर क्यूँ नहीं जाते नदामत में
मैं उस के नाम से चिढ़ने लगा हूँ अब
दुखा है दिल मुहब्बत की अदालत में
हमेशा टाल देते हो यही कह कर
कभी तो हम करेंगे बात फ़ुर्सत में
ख़ुदा के सामने सर फोड़ता हूँ मैं
असर अब है नहीं मेरी इबादत में
लुटेरे भी हवा में उड़ रहे हैं अब
नशा काफ़ी ग़ज़ब का है सियासत में
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जो कभी काम आए न इमदाद को
मुफ़्लिसी की उन्हें बस दुआएँ लगें
मुफ़्लिसी की उन्हें बस दुआएँ लगें
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मैं शहर से तेरे निकल कर अपनी बस्ती जाउँगा
मैं जाउँगा मौजूदगी में तेरी जल्दी जाउँगा
Read Fullमैं जाउँगा मौजूदगी में तेरी जल्दी जाउँगा
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हमारे मुल्क की ये दास्ताँ है
सियासत अब लहू पीने लगी है
सियासत अब लहू पीने लगी है
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मिरे शब्दों को पढ़के ये समझ लो तुम
किसी के सुर्ख़ होंठो की कहानी है
किसी के सुर्ख़ होंठो की कहानी है
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