Piyush Nishchal

Piyush Nishchal

@piyush_nishchal

Piyush Nishchal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Piyush Nishchal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

6

Content

41

Likes

55

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

साहिब-ए-मसनद ज़रा आवाम की भी फ़िक्र कर लो
जान ले लेगी किसी दिन ये तुम्हारी हाकिमिय्यत

Piyush Nishchal

जानता हूँ कि बर्बाद हूँ मैं सो अब
तू मिरा ग़म मना ले नसीहत न दे

Piyush Nishchal

बचपन जवानी फिर मुहब्बत से गुज़र कर इस घड़ी
ऐ क़ब्र आँखें खोल आए हैं तिरे दहलीज़ पे

Piyush Nishchal

कभी शराब तो कभी ये गुल-बदन तुम्हारा जाँ
न  होश  में  कभी  न  नींद से  जगाया है मुझे

Piyush Nishchal

नदी दरख़्त चाँद ये सितारे सब जहाँ में हैं
मगर मुझे तुम्हारा चेहरा देखना सुकूँ दिया

Piyush Nishchal

मुहब्बत हम भी कर तो लें मगर डर है
कलेजा ही न कोई काट ले मेरा

Piyush Nishchal

वो जब आती है तो धोखे की बू आती है
उसको शायद कोई जी भर के चूमा होगा

Piyush Nishchal

जो कभी काम आए न इमदाद को
मुफ़्लिसी की उन्हें बस दुआएँ लगें

Piyush Nishchal

मुझको अंदर से खाता है हिज्र किसी का
वर्ना शब को अच्छा-ख़ासा सोता था मैं 

Piyush Nishchal

फूल से जब-जब भी बातें होती है
मेरा चेहरा तब शगुफ़्ता होता है

इश्क़ के मैदान में सब मिलते हैं
और सबके साथ धोखा होता है

Piyush Nishchal

आजकल पढ़ने लगा हूँ जौन को मैं
या'नी दुनिया से मुझे मतलब नहीं अब

Piyush Nishchal

लोग वो ख़ूबसूरत हुए
जिनके भी होंठ पे तिल हुए

Piyush Nishchal

सिखाया  था  जिसे  मैंने  मुहब्बत  में  वफ़ा  करना
वो लड़की इश्क़ में अब ख़ुद को फ़रज़ाना समझती है

Piyush Nishchal

तुम्हारे होंठ पर इक तिल को देखा तो लगा मुझको
कि इसको पढ़के तेरे इश्क़ में नायाब हो जाऊँ

Piyush Nishchal

तेरी चाहत में बर्बादी का कारण बस इतना-सा है
मुझको ये तेरे गजरा औ' काजल ने बर्बाद किया है

Piyush Nishchal

शराबी हूँ मगर ख़याल रहता है मुझे कि हाँ
शराब के नशे में भी तुम्हें हसीन कहना है

Piyush Nishchal

यक़ीं मानो कि वो अब भी मुहब्बत करती है मुझसे
यक़ीं  ये  भी  करो  यारा  कि मैं अब झूठ कहता हूँ

Piyush Nishchal

हम हिज्र में भी ख़ुश हैं पर दीवार-ओ-दर में रहते हैं
हम शहरयार-ए-ग़म ख़ुदा की हर नज़र में रहते हैं

हम लोग अब इक-दूसरे से मुख़्तलिफ़ होकर हैं ख़ुश
वो अपने घर में रहती है हम अपने घर में रहते हैं

Piyush Nishchal

तेरी आँखों का सताया हूँ बिखर जाने दे
मैं कभी लौट न पाऊँगा कि मर जाने दे

तेरी चौखट से मिरे ख़ून की बू आएगी
क्या कहूँ अब कि यही सच है मगर जाने दे

Piyush Nishchal

यकायक मरना है तो ख़ुद-कुशी कर लो
अगर क़िस्तों में तो फिर दिल्लगी कर लो

नहीं मरना है ज़िंदा भी नहीं रहना
मिरी मानो तो तुम फिर मयकशी कर लो

Piyush Nishchal

LOAD MORE