तेरी आँखों का सताया हूँ बिखर जाने देमैं कभी लौट न पाऊँगा कि मर जाने देतेरी चौखट से मिरे ख़ून की बू आएगीक्या कहूँ अब कि यही सच है मगर जाने दे— Piyush Nishchal