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शाबाश दुनिया जीत के तुम आए हो
सब को हरा के विश्व कप तुम लाए हो
सब को हरा के विश्व कप तुम लाए हो
जो ख़्वाब भारतवासियों ने देखा था
उस ख़्वाब को जी कर के तुम दिखलाए हो
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हुआ कितना आसान अब हर सफ़र है
पड़ी जब से मुर्शद की मुझ पर नज़र है
पड़ी जब से मुर्शद की मुझ पर नज़र है
मिला है उसे हर सुकूॅं इस जहाँ में
रज़ा में रहा इन की जो भी बशर है
है जिस पर हुई इन की रहमत की बर्षा
ज़माने से उस को न फिर कोई डर है
समय रहते जो पा ले जीवन का मतलब
न उन का रहा ये अधर में सफ़र है
यहाँ पर पड़े इन के कोमल चरण हैं
बना फिर वो तीरथ ही सारा नगर है
है अरमाॅं दिलों के सुनो मेरे दिलबर
कि हर बात मानूॅं तेरी हर पहर है
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