Tarun Pandey

Top 10 of Tarun Pandey

    कौन किसकी शक्ल में रहता है अब बोलो ज़मीं पर
    जानवर की शक्ल में इंसान रहते थे यहीं पर

    छीन लो सब कुछ मगर ये याद रखना ओ सितमगर
    तुम मिटाओगे जहाँ आसेब उभरेगा वहीं पर

    क्यों दुआएँ भेज दी जाती हैं वापस आसमाँ से
    उन दुआओं में मिली हैं बद दुआएँ भी कहीं पर

    जानते हैं सब कि दामन साफ़ होगा इसलिए भी
    देख कर हैरान हैं सब ख़ून मेरे आस्तीं पर
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    अकेलापन अकेला छोड़ता तो काम के रहते
    भरी महफ़िल में हम जैसे बशर बस नाम के रहते

    मिरे दिल से मिटा दो उस परी-रू का निशाँ यारो
    ये दरवाज़ा कभी खुलता नहीं उस नाम के रहते

    यहाँ अच्छे बुरे का फ़र्क़ आलिम क्यों बताएगा
    भला इस बे-मुरव्वत बे-ख़िरद आवाम के रहते

    ये भी तो मोजज़े से कम नहीं यारो कि ज़िंदा हूँ
    वो भी दिन रात हाथों में मुसलसल जाम के रहते

    अगर बिजली चमकती है तो बादल भी बरसते हैं
    मुझे मालूम है सब ठीक होगा राम के रहते
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    लगा कर आग घर में फूलना-फलना तो मुश्किल है
    पुरानी छत गिरा कर यार अब चलना तो मुश्किल है

    तिरी हर बात गर मैं मान लूँ तो ख़ुद को खो दूँगा
    अभी मेरा तिरे इस रंग में ढलना तो मुश्किल है

    हरारत है तिरे हाथों में तो छू ले मुझे जल्दी
    बिना तेरे छुए इस लाश का जलना तो मुश्किल है

    मुक़द्दर में लिखी बातें हमेशा सच नहीं होतीं
    मुक़द्दर के भरोसे ही यहाँ चलना तो मुश्किल है

    जो तुम ये सोचते हो ज़ुल्म पर हम कुछ न बोलेंगे
    तो सुन लो आज इस तूफ़ान का टलना तो मुश्किल है
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    बच्चों के हाथों में रख दी अय्यारी टॉफी के बदले
    देखो मेरा ही ख़ूँ अब मुझको छलता है धीरे-धीरे
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    रो रहा है बशर मगर देखो
    ज़िन्दगी को रफ़ू नहीं करता
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    किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
    कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
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    उससे कहता हूँ इश्क़ मुहब्बत में रक्खा क्या है
    पर अपने दिल को ये मैं कैसे समझाऊँ यारो
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    देख कर ग़म, मुस्कुराओ गुनगुनाओ, प्यार से तुम
    दिल के' इन ज़ख़्मों को' सीने से लगाओ, प्यार से तुम

    प्यार क्या है, रोज़ मिन्नत, रोज़ ख़िदमत, रोज़ ज़िल्लत
    जाँ मुझे आगोश में अपने समाओ, प्यार से तुम

    है गुजारी जा रही रातें तिरी तस्वीर तक कर
    यार इससे अब कभी बाहर भी' आओ, प्यार से तुम

    सब यहाँ ख़ुद को ख़ुदा कहते, सभी अच्छे भले हैं
    दोस्त मुझको ख़ुश्क पत्तों से मिलाओ, प्यार से तुम

    माँ कभी जो सो रहीं हों औ' तन्हा ख़ुद को' पाओ
    छोड़ चिंता जल्द मौसी को बुलाओ, प्यार से तुम

    हो नहीं पाती मुलाकातें मगर खलता नहीं ये
    हो सके तो यार अब वापस बुलाओ, प्यार से तुम

    मसअला ये है अधूरे रह गयें हैं ख़्वाब मेरे
    जीने' ख़ातिर कुछ नए सपने दे' जाओ, प्यार से तुम
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    सबसे अच्छी दौलत यारों अय्यारी है
    सोने चांदी से भी अव्वल हुश्यारी है

    रोती है बच्ची पाने को सस्ती रोटी
    क्या बोलूं खुद्दारी है या लाचारी है

    इश्क़ मुहब्बत है गर रस्ता जन्नत का तो
    हिज्र बग़ावत को क्यों कहते गद्दारी है

    खाना है मेवा बिन सेवा सरकारों को
    देखो चारों सम्तें गिरवी हुश्यारी है

    लेटा हूँ मैं ओढ़े चादर शैय्या पर अब
    माशूका के घर शादी की तैय्यारी है
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    Tarun Pandey
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    मुझको फँसा कर तू चला बहरे जहां आराम से
    डाला क़फ़स में इक नया अग्यार किस इल्ज़ाम से

    करता मदारी खेल बंदर की बदौलत शान से
    रहता मगर बंदर सदा महरूम जग में नाम से

    जो दिख रहा ज़ालिम उसी ने दूसरों के वास्ते
    देखो कटा कर रख दिया सर कितने' ही आराम से

    फैला कभी था ख़ूँ मिरे आँगन में' हर-सू, यार सुन
    औ' ख़ूँ का था वो रंग गाढ़ा भी बहुत गुलफ़ाम से

    ये वक़्त क्यों मुझको नहीं मिलता कभी शिरकत करूँ
    हल्ला यही है दोस्तों में "ये मरेगा काम से"
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    Tarun Pandey
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