laga kar aag ghar men phoolna-phalna to mushkil hai | लगा कर आग घर में फूलना-फलना तो मुश्किल है

  - Tarun Pandey

लगा कर आग घर में फूलना-फलना तो मुश्किल है
पुरानी छत गिरा कर यार अब चलना तो मुश्किल है

तिरी हर बात गर मैं मान लूँ तो ख़ुद को खो दूँगा
अभी मेरा तिरे इस रंग में ढलना तो मुश्किल है

हरारत है तिरे हाथों में तो छू ले मुझे जल्दी
बिना तेरे छुए इस लाश का जलना तो मुश्किल है

मुक़द्दर में लिखी बातें हमेशा सच नहीं होतीं
मुक़द्दर के भरोसे ही यहाँ चलना तो मुश्किल है

जो तुम ये सोचते हो ज़ुल्म पर हम कुछ न बोलेंगे
तो सुन लो आज इस तूफ़ान का टलना तो मुश्किल है

  - Tarun Pandey

Dosti Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Tarun Pandey

As you were reading Shayari by Tarun Pandey

Similar Writers

our suggestion based on Tarun Pandey

Similar Moods

As you were reading Dosti Shayari Shayari