अधूरी मुहब्बत जताना नहीं तुम
कभी तोड़ सपने रुलाना नहीं तुम
लुटा हूँ अगर प्यार में हमनवा मैं
फ़साना किसी को बताना नहीं तुम
बुतों के लिए लड़ सभी मर रहे हैं
बुतों को नगर में लगाना नहीं तुम
अगर मानती हो मुझे दोस्त अपना
किसी को कभी भी सताना नहीं तुम
सफ़र में बिछड़ना मुक़द्दर सही पर
निशानी हमारी मिटाना नहीं तुम
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