हर पल होती है क्या ये कठिनाई देखो
मज़दूरों की क़िस्मत से पस्पाई देखो
मत आओ बातों में अब यारों की साहब
समझो बातों को मन की सच्चाई देखो
देखो सबको मरते गोरे रुख़्सारों पर
फिर उन गोरे जिस्मों की तन्हाई देखो
बातें जो करते हैं अच्छी भी सच्ची भी
मौक़े पर होती ग़ायब दानाई देखो
मजबूरों की साँसें भी हैं सुस्ताई सी
देखो देखो वो आँखें पथराई देखो
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