ik ladki jo shabdon ko halke bhaavon ko bhari kar deti thii | इक लड़की जो शब्दों को हल्के, भावों को भारी कर देती थी

  - Tarun Pandey

इक लड़की जो शब्दों को हल्के, भावों को भारी कर देती थी
वो लिखती थी ख़ुद को राधा, आशिक़ को गिरधारी कर देती थी

राहों में जो मिलते काँटे हँसते हँसते सारे दुःख सहती थी
पर अपनों को कोई कुछ बोले तो मारा मारी कर देती थी

देखो उसके आसूँ में गंगा कावेरी, बातों में नादानी
आसूँ से गीली हो धरती फसलों की तैय्यारी कर देती थी

नर्गिस चम्पा गुड़हल गुलमोहर यारब उसको इतना भाते थे
हाथों को कर लोहा पगली, चट्टानों में क्यारी कर देती थी

महफ़िल में वो दिखती थी ज़िंदा, हरपल हँसती गाती चिल्लाती
तन्हाई में पर वो रो रो कर ख़ुद को बेचारी कर देती थी

  - Tarun Pandey

Aurat Shayari

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