Tarun Pandey

Tarun Pandey

@zindagiekkavita

Tarun Pandey shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Tarun Pandey's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तशफ़्फ़ी क्यूँ नहीं देता कभी मुझ को मिरा बेटा अरे मेरे गले लगने से उस का क्या बिगड़ता है — Tarun Pandey
रो रहा है बशर मगर देखो ज़िन्दगी को रफ़ू नहीं करता — Tarun Pandey
चखने दिया है ज़ाइक़ा उस को बुराई का के यूँँ कब साफ़ पानी में कमल का फूल खिलता है ख़ुदा — Tarun Pandey
मुझे पढ़ना मगर आराम से यारों⠀ ग़ुलामी को मलंगों से परे रखना⠀ — Tarun Pandey
उस सेे कहता हूँ इश्क़ मुहब्बत में रक्खा क्या है पर अपने दिल को ये मैं कैसे समझाऊँ यारो — Tarun Pandey
लिख मुक़द्दर को मिरे तू अब समुंदर की तरह प्यास से मैं तोड़ूं दम, दे ऐसी' बर्बादी मुझे — Tarun Pandey
बच्चों के हाथों में रख दी अय्यारी टॉफी के बदले देखो मेरा ही ख़ूँ अब मुझ को छलता है धीरे-धीरे — Tarun Pandey
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है — Tarun Pandey
मैं भी कभी अपना समझता था उसे पर अब नहीं फुसला के वो तो प्यार से लोगों को छलता है ख़ुदा — Tarun Pandey
गिरते हैं आँसू तब जा कर उठती है जुम्बिश लहरों में सुन कर चीख़ें हर-सू मैं रहमत रहमत चिल्लाऊँ यारों — Tarun Pandey
मैं काम का हल्ला नहीं बस काम करता हूँ ख़ुदा मुश्किल बहुत मेरा गुज़र मैं रोज़ मरता हूँ ख़ुदा — Tarun Pandey

Ghazal

इस शहर में अब रक़्स बोलो कौन करता है ख़ुदा ये शहर अब ख़ामोश इतना क्यूँ ही रहता है ख़ुदा मैं ने उसे ये सोच कर रक्खा बुरे लोगों के बीच कब साफ़ पानी में कमल का फूल खिलता है ख़ुदा मुझ को तो लगता है उसे जैसे नज़र ही लग गई है फ़न बहुत फिर भी वो लोगों को तरसता है ख़ुदा उस के मुक़द्दर में कहाँ है जीत की रेखा बशर हारे हुए लोगों का वो मुर्शिद है कहता है ख़ुदा माँ बाप के ही प्यार से रौशन था ये मेरा जहाँ और छीन कर के प्यार मेरा ख़ूब हँसता है ख़ुदा मैं भी कभी अपना समझता था उसे पर अब नहीं फुसला के वो तो प्यार से लोगों को छलता है ख़ुदा तरुण पाण्डेय — Tarun Pandey
है प्यार में दर्द कितना ये मत गिनाइएगा मैं सर-फिरा हूँ दिमाग़ की बातों' में मुझे मत फँसाइएगा मैं सर-फिरा हूँ दवा अगर काम में न आए बुलाइएगा मिरे सनम को ले कर के ही नाम उस का मुझ को बचाइएगा मैं सर-फिरा हूँ नहीं कनेक्शन है रौशनी से न जुगनुओं का शरर मुयस्सर है मशवरा मेरा मुझ सेे मिलने न आइएगा मैं सर-फिरा हूँ मैं हिज्र में अब लड़ूँ सभी से करूँँ अजीबो गरीब हरकत घुटन भरी ज़िन्दगी से मुझ को बचाइएगा मैं सर-फिरा हूँ ये जो मुहब्बत है वो मुजस्सम गुनाह है क्या अगर है रहबर मिरा निशाँ आप ही ज़मीं से मिटाइएगा मैं सर-फिरा हूँ — Tarun Pandey