चला जाऊँ कहीं भी मैं, मुझे भगवान दिखते हैं

कठिन कितने भी हों रस्ते नए इम्कान दिखते हैं

मुझे कहती है मेरी माँ कि वापस गाँव आ जाओ
तुम्हारे बिन ये घर आँगन बड़े वीरान दिखते हैं

ये तस्वीरों में दिखने वाले सब, अपने नहीं होते
यहाँ अपने वो हैं जो दर्द के दौरान दिखते हैं

मिरे घर के बुज़ुर्गों ने बताया था कभी मुझ को
वे बे-ईमान हैं जो उम्र भर हलकान दिखते हैं

किनारा कर लिया है तो मिरे घर से हटो बच्चों
तुम्हें बूढे सभी बिन काम के सामान दिखते हैं

— Tarun Pandey

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