आख़िरी बार मिरा साथ निभाने आते
काश तुम भी कोई तरक़ीब लगाने आते
हैं बुरे और बुराई में सने रहते हैं
पर बुरे वक़्त में हम ही तो बचाने आते
बंद कमरों में बदलते हैं मुक़द्दर लड़के
हम समझदार हैं लौ ख़ुद की बुझाने आते
यूँँ तो बच्चों से सरोकार नहीं रखते हैं
और आते भी हैं तो सिर्फ़ डराने आते
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