हो जाए कुछ भी वो लड़की कभी भी ग़म नहीं करती
मगर ये ज़िंदगी देखो सितम भी कम नहीं करती
सुनो बारिश ने उस से उस की इक औलाद छीनी है
मगर हर साल बारिश में तो वो मातम नहीं करती
अज़िय्यत के दिनों में भी दु'आओं में अदू शामिल
वो लड़की प्यार की लौ को कभी मद्धम नहीं करती
तिरे इस दुख का रोना बंद हो तो सुन तमाशाई
यहाँ हर बार जनता आँखों को पुर नम नहीं करती
सभी कहते हैं बेटी ख़ुश है इस घर में मगर देखो
ज़माना हो गया बारिश में वो ऊधम नहीं करती
— Tarun Pandey















