pitaa ko ik anokha khwaab yaaron ab pirona hai | पिता को इक अनोखा ख़्वाब यारों अब पिरोना है

  - Tarun Pandey

पिता को इक अनोखा ख़्वाब यारों अब पिरोना है
उन्हें तो दर्द के सीने में इक काँटा चुभोना है

पिरोए थे कभी जो ख़्वाब माँ ने आज सच होंगे
विदाई का समय है घर में सबको आज रोना है

पिता को तो अकेले में कहीं रोना पड़ेगा अब
बिदाई में उन्हें माँ की तरफ़ से भी तो रोना है

तुम्हारे आने से रौशन हुआ इक घर मगर बेटी
तुम्हारे जाने से तन्हा बहुत इस घर का कोना है

ख़ुशी को थाम कर आगे बढ़ो हँसते हुए बच्चों
कि तुमको ज़िंदगी के रंग में ख़ुद को डुबोना है

  - Tarun Pandey

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