है प्यार में दर्द कितना ये मत गिनाइएगा मैं सर-फिरा हूँ

दिमाग़ की बातों' में मुझे मत फँसाइएगा मैं सर-फिरा हूँ

दवा अगर काम में न आए बुलाइएगा मिरे सनम को
ले कर के ही नाम उस का मुझ को बचाइएगा मैं सर-फिरा हूँ

नहीं कनेक्शन है रौशनी से न जुगनुओं का शरर मुयस्सर
है मशवरा मेरा मुझ से मिलने न आइएगा मैं सर-फिरा हूँ

मैं हिज्र में अब लड़ूँ सभी से करूँ अजीबो गरीब हरकत
घुटन भरी ज़िन्दगी से मुझ को बचाइएगा मैं सर-फिरा हूँ

ये जो मुहब्बत है वो मुजस्सम गुनाह है क्या अगर है रहबर
मिरा निशाँ आप ही ज़मीं से मिटाइएगा मैं सर-फिरा हूँ

— Tarun Pandey

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Rahbar Shayari

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