kiya barbaad yuñ khud ko yahaañ jhoo | किया बर्बाद यूँँ ख़ुद को यहाँ झूठी ख़ुदाई पर

  - Tarun Pandey

किया बर्बाद यूँँ ख़ुद को यहाँ झूठी ख़ुदाई पर
रहा रुसवा ज़माने से क़यामी बेवफ़ाई पर

ज़माने ने बहुत खेला हमारे नाम से साथी
रुला कर दूसरों को हँस रही क़िस्मत जुदाई पर

नयापन है लिबासों में मगर आदत पुरानी है
यहाँ दौलत बहुत हावी रही देखो रसाई पर

बना कर घर नज़र में बन गया भगवान वो यूँँही
मगर सोचो गरीबों को मिले सब घर तराई पर

बग़ावत है भड़कती सिर्फ़ सच्चाई छुपाने को
बग़ावत क्यूँ नहीं होती रिवायत की बुराई पर

  - Tarun Pandey

Qismat Shayari

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