mashhoor bhi hain badnaam bhi hain khushiyon ke naye paighaam bhi hain | मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं

  - Anjum Barabankvi

मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं
कुछ ग़म के बड़े इनाम भी हैं पढ़िए तो कहानी काम की है

  - Anjum Barabankvi

Gham Shayari

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    हर एक लफ़्ज़ में सीने का नूर ढाल के रख
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    जो दोस्तों की मोहब्बत से जी नहीं भरता
    तो आस्तीन में दो-चार साँप पाल के रख

    तुझे तो कितनी बहारें सलाम भेजेंगी
    अभी ये फूल सा चेहरा ज़रा सँभाल के रख

    यहाँ से धूप के नेज़े बुलंद होते हैं
    तमाम छाँव के क़िस्सों पे ख़ाक डाल के रख

    महक रहे हैं कई आसमान मिट्टी में
    क़दम ज़मीन-ए-मोहब्बत पे देख-भाल के रख

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    Anjum Barabankvi

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