ज़ख़्म लगे हैं कितने दिल पर याद करूँँ या तुम को देखूँशाद नहीं हूँ मैं तुम को नाशाद करूँ या तुम को देखूँउम्र गए पे तेरी सूरत और मिरी आँखें टकराईंउम्र गए में सोची वो फ़रियाद करूँ या तुम को देखूँ— Dhiraj Singh 'Tahammul'