हारना या जीतना कब तक मुक़द्दर तय करेंगे
मंज़िल-ए-मक़सूद तो उम्मीद के पर तय करेंगे
इस जहाँ में जब तलक मेयार लोगों का गिरेगा
तब तलक सब कुछ यहाँ पर लाव-लश्कर तय करेंगे
कूच जो करते नहीं घर की तरफ़ बिन कुछ कमाए
जीत कर तमगा वही घर का मुक़द्दर तय करेंगे
बाग़ की रौनक गुल-ए-तर से है माली जानता है
और ये अशआर कैसे हैं सुख़न-वर तय करेंगे
ये महल तेरा भले दिखने में सुंदर हो सिकंदर
नींव की ताक़त तो चलने वाले पत्थर तय करेंगे
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