haarna ya jeetna kab tak muqaddar tay karenge | हारना या जीतना कब तक मुक़द्दर तय करेंगे

  - Tarun Pandey

हारना या जीतना कब तक मुक़द्दर तय करेंगे
मंज़िल-ए-मक़सूद तो उम्मीद के पर तय करेंगे

इस जहाँ में जब तलक मेयार लोगों का गिरेगा
तब तलक सब कुछ यहाँ पर लाव-लश्कर तय करेंगे

कूच जो करते नहीं घर की तरफ़ बिन कुछ कमाए
जीत कर तमगा वही घर का मुक़द्दर तय करेंगे

बाग़ की रौनक गुल-ए-तर से है माली जानता है
और ये अशआर कैसे हैं सुख़न-वर तय करेंगे

ये महल तेरा भले दिखने में सुंदर हो सिकंदर
नींव की ताक़त तो चलने वाले पत्थर तय करेंगे

  - Tarun Pandey

Jeet Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Tarun Pandey

As you were reading Shayari by Tarun Pandey

Similar Writers

our suggestion based on Tarun Pandey

Similar Moods

As you were reading Jeet Shayari Shayari