dekh kar gham muskuraao gungunaao pyaar se tum | देख कर ग़म, मुस्कुराओ गुनगुनाओ, प्यार से तुम

  - Tarun Pandey

देख कर ग़म, मुस्कुराओ गुनगुनाओ, प्यार से तुम
दिल के' इन ज़ख़्मों को' सीने से लगाओ, प्यार से तुम

प्यार क्या है, रोज़ मिन्नत, रोज़ ख़िदमत, रोज़ ज़िल्लत
जाँ मुझे आग़ोश में अपने समाओ, प्यार से तुम

है गुजारी जा रही रातें तिरी तस्वीर तक कर
यार इस सेे अब कभी बाहर भी' आओ, प्यार से तुम

सब यहाँ ख़ुद को ख़ुदा कहते, सभी अच्छे भले हैं
दोस्त मुझको ख़ुश्क पत्तों से मिलाओ, प्यार से तुम

माँ कभी जो सो रहीं हों औ' तन्हा ख़ुद को' पाओ
छोड़ चिंता जल्द मौसी को बुलाओ, प्यार से तुम

हो नहीं पाती मुलाक़ातें मगर खलता नहीं ये
हो सके तो यार अब वापस बुलाओ, प्यार से तुम

मसअला ये है अधूरे रह गयें हैं ख़्वाब मेरे
जीने' ख़ातिर कुछ नए सपने दे' जाओ, प्यार से तुम

  - Tarun Pandey

Aabroo Shayari

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