yaar bichhadkar tumne hansta aapme ghar veeraan kiya | यार बिछड़कर तुमने हँसता बसता घर वीरान किया

  - Ali Zaryoun

यार बिछड़कर तुमने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझको भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया

  - Ali Zaryoun

Bhai Shayari

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As you were reading Shayari by Ali Zaryoun

    मन जिस का मौला होता है
    वो बिल्कुल मुझ सा होता है

    तुम मुझको अपना कहते हो
    कह लेने से क्या होता है

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    मर जाना अच्छा होता है
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    Ali Zaryoun
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    छूकर दर-ए-शिफा को शिफा हो गया हूं मैं
    इस अरसा-ए-वबा में दुआ हो गया हूं मैं

    इक बे-निशा के घर का पता हो गया हूं मैं
    हर ला दवा के ग़म की दवा हो गया हूं मैं

    मैं था जो अपनी आप रुकावट था साहिबा
    अच्छा हुआ कि ख़ुद से जुदा हो गया हूं मैं

    तूने उधर जुदाई का सोचा ही था इधर
    बैठे-बिठाए तुझ से रिहा हो गया हूं मैं

    तुमको खबर नहीं है कि क्या बन गए हो तुम
    मुझ को तो सब पता है कि क्या हो गया हूं मैं

    मैं हूं तो लोग क्यूं मुझे कहते हैं कि वो हो तुम
    गर तुम नहीं तो किस में फना हो गया हूं मैं
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    Ali Zaryoun
    आसान तो ये कार-ए-वफ़ा होता नहीं है
    कहने को तो कहते हैं किया होता नहीं है

    अव्वल तो मैं नाराज नहीं होता हूं लेकिन
    हो जाऊं तो फिर मुझ सा बुरा होता नहीं है

    गुस्से में तो वो मां की तरहा होता है बिल्कुल
    लगता है खफा सच में खफा होता नहीं है

    तुम मेरे लिए जंग करोगे अरे छोड़ो
    तुमसे तो मियां मिलने भी आ होता नहीं है

    हम अपनी मोहब्बत में समझ ले तो समझ ले
    वैसे किसी बंदे में खुदा होता नहीं है

    कहते हैं खुदा वो है की जो कह दे तो सब हो
    वैसे मेरे कहने से भी क्या होता नहीं है

    ईमान है या चांद को लाना है ज़मीं पर
    कहते हो कि ले आता हूं ला होता नहीं है

    मुझ पर जो अली खास करम है तो मेरे दोस्त
    हर दिल भी तो मुझ जैसा सिया होता नहीं है
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    Ali Zaryoun
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    Ali Zaryoun
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    तुझे बिगाड़ के मैंने बुरा नहीं किया है
    Ali Zaryoun
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