अभी दस्तक जो दिल पे दे रहा है
समझ लो जान मेरी ले रहा है
समझ लो जान मेरी ले रहा है
किसी से पूछ लेना ही सही है
मेरे बिन रात वो कैसे रहा है
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जिसे समझा था नाकारा नहीं था
वो लड़का यार आवारा नहीं था
वो लड़का यार आवारा नहीं था
किसी हासिल नज़र की कहकशाँ में
कहीं भी एक वो तारा नहीं था
मुहब्बत में भले वो मर चुका है
मगर हालात का मारा नहीं था
सभी को चाहने वाला अकेला
किसी दिल में वो बेचारा नहीं था
किसी से हार बैठा है अभी वो
ख़ुदा से जो कभी हारा नहीं था
सड़क सूनी पड़ी है भीड़ में भी
समुंदर पी गया खारा नहीं था
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मैं उजालों का नहीं रातों का क़ायल हूँ सनम
आप भी इक चाँद हैं ये जानकर अच्छा लगा
आप भी इक चाँद हैं ये जानकर अच्छा लगा
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पीठ में ख़ंजर सुना है मारते हैं दोस्त भी
यार फिर तो दोस्त को भी आज़माना चाहिए
यार फिर तो दोस्त को भी आज़माना चाहिए
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कह उसे ये तू लिहाज़ा ख़त जलाए आज ही
मौत के दिन ही बदन को भी जलाना चाहिए
मौत के दिन ही बदन को भी जलाना चाहिए
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इक सदी का साथ तो था उस के मेरे दरमियाँ
फिर उसे ये क्यूँ लगा मैं प्यार उस का था नहीं
तोड़ने को ये खिलौना ही मिला था क्या उसे
क्यूँ किया उस ने ये दिल व्यापार उस का था नहीं
मैं भला कैसे समझ पाता किसी की चाल को
यार आँखों में कभी इनकार उस का था नहीं
सौ दिलासों का मैं आख़िर क्या करूँगा ये कहो
जानता हूँ मैं अभी मैं प्यार उस का था नहीं
भारती ये ज़िंदगी हर दिन नई होगी यहाँ
जो नहीं है पास तू हक़दार उस का था नहीं
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आप की बातों को बेशक मानकर अच्छा लगा
दोस्त प्रेमी बन सकेंगे जानकर अच्छा लगा
दोस्त प्रेमी बन सकेंगे जानकर अच्छा लगा
सालों से उस बंद कमरे की घुटन में क़ैद था
ख़ुद को तेरे ग़म से यूँ अनजान कर अच्छा लगा
एक ही तस्वीर को घंटों निहारा करता हूँ
आईने में ख़ुद को भी पहचानकर अच्छा लगा
लग गई ये उम्र सारी एक ही के प्यार में
प्यार में वो एक ज़िद भी ठानकर अच्छा लगा
कब से ही इस दिल में मेरे जिस घड़ी का ख़ौफ़ था
दो ही पल का उस को अब मेहमान कर अच्छा लगा
'भारती' वो शख़्स जो घर कर गया था मन में यूँॅं
एक जो वो था ख़ुदा इंसान कर अच्छा लगा
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