दर्द में जान जा रही होगी
आँसुओं में नहा रही होगी
Read Fullआँसुओं में नहा रही होगी
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होंठों पर इक बात छुपाकर रक्खी है
प्रिया नेह बरसात छुपाकर रक्खी है
प्रिया नेह बरसात छुपाकर रक्खी है
जिस रैना में स्वप्न मिलन के देखे थे
वो काजल सी रात छुपाकर रक्खी है
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साथ तेरे और चल सकता नहीं
राख हूँ अब और जल सकता नहीं
राख हूँ अब और जल सकता नहीं
आँधियाँ आएँ कि अब तूफ़ाँ चलें
राह अपनी मैं बदल सकता नहीं
थक गया हूँ बे-सबब चलते हुए
इश्क़ में अब और चल सकता नहीं
जिस्म की बेताबियों से मात खा
रूह को अब और छल सकता नहीं
छोड़ दूँगा ये जहाँ तेरे लिए
अब तुझे मैं और खल सकता नहीं
कब तलक पानी से मैं डरता रहूँ
बर्फ़ हूँ पर और गल सकता नहीं
रात से मैं दोस्ती कैसे करूँ
सूर्य हूँ अब और ढल सकता नहीं
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मैं और बस मेरी तन्हाई हम दोनों
प्यार मोहब्बत और जुदाई हम दोनों
प्यार मोहब्बत और जुदाई हम दोनों
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छू के उन के बदन को बूँदों से
आज बारिश ने मयकशी कर ली
आज बारिश ने मयकशी कर ली
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