है नहीं मंज़ूर जीना बिन तुम्हारेमैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँतोड़ कर सारी रिवाजें सारी रस्मेंमैं तुम्हारे पाँव छूना चाहता हूँ— Yogendra Singh Raghuwanshi