जग उठा हूँ रह-ए-ज़िंदा में सो जलना पड़े है
मैं वगरना वो दिया हूँ जिसे ज़ुल्मत है पसंद
मैं वगरना वो दिया हूँ जिसे ज़ुल्मत है पसंद
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अब न थोड़ी भी मशक़्क़त हो रही है
और मोहब्बत पे मोहब्बत हो रही है
और मोहब्बत पे मोहब्बत हो रही है
ताक भी लें गर हसीना कोई हम तो
दिल में अब सीधी बग़ावत हो रही है
ख़ाली था वो जब गया इंसाँ के दिल में
आज फिर शायद इबादत हो रही है
शब मोहब्बत की हिमायत में गुज़ारी
दिन मोहब्बत से शिकायत हो रही है
हो रहा है इश्क़ उस लड़की से मुझ को
हर किसी से जिस को चाहत हो रही है
कह रहे हैं बे-वफ़ा तुझ को वो 'चेतन'
अब मोहब्बत में सियासत हो रही है
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देखते हैं जो निगाह-ए-इश्क़ से 'चेतन'
फ़र्क तुझ
फ़र्क तुझ
में और मुझ
में कर नहीं पाते
Read Fullमें कर नहीं पाते
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आता है मुझे फ़ासले से इश्क़ ब-ख़ूब
वो चाँद मिरी पहली मोहब्बत थी सनम
वो चाँद मिरी पहली मोहब्बत थी सनम
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हुए आँसू कितने ही बर्बाद समझो
गई थूकी कितनी ही फ़रियाद समझो
गई थूकी कितनी ही फ़रियाद समझो
वो जितनी मोहब्बत भी अंदर थी मेरे
वो सब हो गईं अब से आज़ाद समझो
मोहब्बत नहीं बस की है बात सबके
गए क़ब्रों तक इस के इफ़्साद समझो
है दिल टूट कर बिखरा सीने में जिस का
मोहब्बत की उस ने ही ईजाद समझो
यहाँ बोल बैठे हैं सब बोल सारे
जो ख़ामोशी बोले तो उस्ताद समझो
रहो हावी ही शामों पर आप मेरी
छलकते हुए जामों को याद समझो
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