इश्क़ में जिसको भी डर लगता नहीं है
    समझो वो इस खेल में पहला नहीं है

    उसने पूछा माँगते हो क्या ख़ुदा से
    वो सिवा जिसके कि कुछ माँगा नहीं है

    वो मोहब्बत में नहीं है सच है लेकिन
    ये भी सच है दोस्त वो मेरा नहीं है

    उम्र भर का हमने वादा कर लिया था
    और कुछ भी उम्र भर रहता नहीं है

    ख़ुदकुशी का सोच भी लूँ गर कभी तो
    दिल ये कहता है सही मौक़ा नहीं है
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    Kumar gyaneshwar
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    चाहते हो उसे पता न लगे
    दूसरा इश्क़ दूसरा न लगे

    बेवफ़ाई गुनाह है और तुम
    सोचते हो कि बद-दु'आ न लगे
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    Kumar gyaneshwar
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    जो बना के तुझको दुनिया हसीं नहीं करता
    फिर यहाँ ख़ुदा पर कोई यक़ीं नहीं करता
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    है नहीं अब जो रिश्ता हमारा
    कर रहा क्यों तू चर्चा हमारा

    बाँधी थी तुमने हाथों घड़ी जब
    ख़ुश था कितना ये चेहरा हमारा

    इक तिरे माथे पर बोसा देकर
    टूटता था यूँ रोज़ा हमारा

    कहता हूँ सबसे रोता नहीं मैं
    आँखें ही जाने गिर्या हमारा

    तेरे जाने पे अब सोचता हूँ
    था कभी तू ही साया हमारा

    अब न कर हमसे बातें वफ़ा की
    जानता है तू ग़ुस्सा हमारा

    बाद तेरे बदल जाना है सब
    छोड़कर बस ये लहजा हमारा

    इश्क़ करने से पहले ऐ लड़कों
    देख लेना ये कतबा हमारा

    शायरी और ये नौकरी भी
    दोनों से चलता ख़र्चा हमारा
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    Kumar gyaneshwar
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    सीखनी है अब तेरे जैसी ही अदा मुझको
    लोग ख़ामख़ा ही कहते हैं जाँ बुरा मुझको

    तुम से इश्क़ में बस ये फ़ायदा हुआ है अब
    लोग दे रहे हैं हर बात पर दुआ मुझको

    यार सारे मेरे ये पूछते हैं कैसा हूँ
    बस ये दिल ही टूटा है और क्या हुआ मुझको

    इक दफ़े क़ज़ा फ़िर छू कर चली गई यारों
    जाने कौन आख़िर ऐसे बचा रहा मुझको
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    Kumar gyaneshwar
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    तेरे जाने के सदमे से कभी बाहर नहीं आए
    और हमको इम्तिहान-ए-इश्क़ में नम्बर नहीं आए


    हमारे साथ चलने की तमन्ना रखने वाले तुम

    ये भी अब चाहते हो राह में पत्थर नहीं आए
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    एक तस्वीर जो बन आती है बीनाई में
    याद बस उस को ही करता हूँ मैं तन्हाई में

    हम को अब जाके ये मालूम हुआ है यारों
    कितना कुछ होता है इक शख़्स की परछाई में
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    Kumar gyaneshwar
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    ये मैंने कब कहा कि बस मुझी से राब्ता रहे
    अगर जो कुछ नहीं है तो मिरी जाँ फ़ासला रहे

    तेरे दिए हुए वो सारे फूल सूख जाने हैं
    तेरा दिया हुआ ये ज़ख्म तो हरा भरा रहे
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    Kumar gyaneshwar
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    रंग लाल और इक अदा-ए-ख़ास चेहरा
    जी रहा है देखकर जिसे उदास चेहरा

    क्यों करें ग़मो का ज़िक्र अब किसी के पास हम
    साथ है मिरे जो एक ग़म शनास चेहरा
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    Kumar gyaneshwar
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    वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है
    न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है


    हमारे साथ रहकर तुम भी इतना सीख जाओगे

    पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।
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    Kumar gyaneshwar
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