है नहीं अब जो रिश्ता हमारा
कर रहा क्यूँ तू चर्चा हमारा
बाँधी थी तुम ने हाथों घड़ी जब
ख़ुश था कितना ये चेहरा हमारा
इक तिरे माथे पर बोसा देकर
टूटता था यूँ रोज़ा हमारा
कहता हूँ सब से रोता नहीं मैं
आँखें ही जाने गिर्या हमारा
तेरे जाने पे अब सोचता हूँ
था कभी तू ही साया हमारा
अब न कर हम से बातें वफ़ा की
जानता है तू ग़ुस्सा हमारा
बा'द तेरे बदल जाना है सब
छोड़ कर बस ये लहजा हमारा
इश्क़ करने से पहले ऐ लड़कों
देख लेना ये कतबा हमारा
शा'इरी और ये नौकरी भी
दोनों से चलता ख़र्चा हमारा
— Kumar gyaneshwar















