होश सबके ठिकाने लगेंगे
'इश्क़ जब आज़माने लगेंगे
तुमको भी लगता है सब नया कुछ
तुमको भी सब पुराने लगेंगे
बाप की क़द्र आती समझ तब
बेटे जब ख़ुद कमाने लगेंगे
यूँँ समझने की हमको न सोचो
तुमको इस
में ज़माने लगेंगे
देख ले कोई आँखें तुम्हारी
आग दरिया बुझाने लगेंगे
उसके छू लेने के बाद यारों
ज़ख़्म सारे सुहाने लगेंगे
उस गली में जहाँ घर तुम्हारा
लोग सजदे को जाने लगेंगे
जितनी आसानी से खुलते थे हम
उतने अब शाख़साने लगेंगे
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