सच है मुझे ख़राब का मतलब नहीं पता

ऐसा नहीं अज़ाब का मतलब नहीं पता

वो शख़्स जिस ने देखा नहीं तुझ को अबतलक
समझो उसे शबाब का मतलब नहीं पता

क्या है पता कि देखते हैं तुझ को देर तक
वो जिन को ला-जबाव का मतलब नहीं पता

मैं उस की आँखें देखता और सोचता हूँ ये
दुनिया को फिर शराब का मतलब नहीं पता

हम इश्क़ करने वालों में बस इक ख़राबी है
हम को शिकस्त-याब का मतलब नहीं पता

तू उस के साथ कब से है और वो कि ख़ुश नहीं
फिर उस को दस्तियाब का मतलब नहीं पता

— Kumar gyaneshwar

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Rahbar Shayari

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