ये इश्क़-विश्क़ का क़िस्सा तमाम हो जाएसफ़ेद दाढ़ी हवस की ग़ुलाम हो जाएजवान लड़कियों बूढ़ों से तुम रहो हुश्यारन जाने कौन कहाँ आसाराम हो जाए— Paplu Lucknawi