जिस को कहते रहे हम यार हमारा होगा
उस की तस्वीर से आगे का गुज़ारा होगा
मैं ये अब शर्त लगा सकता हूँ उस के जानिब
है ये मुमकिन नहीं वो शख़्स तुम्हारा होगा
लौट के आना है उस को कभी लेकिन मैं ने
साफ कह देना है कुछ भी न दुबारा होगा
जंग इक जीत के जो लौटा हूँ दरिया से मैं
अब तो हर सम्त किनारा ही किनारा होगा
— Kumar gyaneshwar















