जिसको कहते रहे हम यार हमारा होगा
उसकी तस्वीर से आगे का गुज़ारा होगा
मैं ये अब शर्त लगा सकता हूँ उसके जानिब
है ये मुमकिन नहीं वो शख़्स तुम्हारा होगा
लौट के आना है उसको कभी लेकिन मैंने
साफ कह देना है कुछ भी न दुबारा होगा
जंग इक जीत के जो लौटा हूँ दरिया से मैं
अब तो हर सम्त किनारा ही किनारा होगा
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