सुख़न की बदहवा सेी मार डालेगी
मुझे तो ये उदासी मार डालेगी
यूँ मेरा हाल हर इक से न पूछा कर
कि तुझ को ग़म-शनासी मार डालेगी
किसी को झूठे अंदाज़ों से मरना है
किसी को ख़ुश-क़यासी मार डालेगी
मोहब्बत दिल से करने वालों को इक दिन
बदन की बे-लिबासी मार डालेगी
तिरे बारे में जितना जानता हूँ अब
कि मुझ को ख़ुद-शनासी मार डालेगी
— Kumar gyaneshwar















