सुख़न की बदहवा सेी मार डालेगी
मुझे तो ये उदासी मार डालेगी
यूँँ मेरा हाल हर इक से न पूछा कर
कि तुझको ग़म-शनासी मार डालेगी
किसी को झूठे अंदाज़ों से मरना है
किसी को ख़ुश-क़यासी मार डालेगी
मोहब्बत दिल से करने वालों को इक दिन
बदन की बे-लिबासी मार डालेगी
तिरे बारे में जितना जानता हूँ अब
कि मुझको ख़ुद-शनासी मार डालेगी
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