देख कर आज वो रुख़सार खुले
यार फिर कितनों के में'यार खुले
एक उम्मीद तिरे आने की बस
हैं सभी के सभी बाज़ार खुले
दोस्त ने पहले भरोसा दिया और
फिर रखे पास में हथियार खुले
— Kumar gyaneshwar
यार फिर कितनों के में'यार खुले
एक उम्मीद तिरे आने की बस
हैं सभी के सभी बाज़ार खुले
दोस्त ने पहले भरोसा दिया और
फिर रखे पास में हथियार खुले
Other ghazal from the same pen
Shers of faith.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling