waqt dena tha jo zindagi ko | वक़्त देना था जो जिंदगी को

  - Kumar gyaneshwar

वक़्त देना था जो जिंदगी को
दे रहे हैं वो सब नौकरी को

उसने तसवीर भेजी थी अपनी
इतना काफ़ी था मेरी ख़ुशी को

मैं मोहब्बत के लायक नहीं हूँ
कौन समझेगा इस बेबसी को

बेटी ही माँगी उसने ख़ुदास
रौशनी चाहिए तीरगी को

लौट आने का मतलब वो जाने
जो गया हो कभी ख़ुदकुशी को

जिस्म ही चाहता हूँ अ
गर मैं
आग लग जाए इस तिश्नगी को

'इश्क़ करने से पहले ये समझो
जानना पड़ता है सादगी को

क्या नहीं दुनिया में अब तुम्हारे
और क्या चाहिए आदमी को

एक चेहरा बना कर ख़ुदा ने
छोड़ डाला है कारीगरी को

  - Kumar gyaneshwar

Aanch Shayari

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