ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैंइस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैंमेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैंसुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं— Ashu Mishra