मेरी आँखों से हो ओझल रहा है,
तेरा किरदार हो धूमल रहा है,
भला जिसका तू केवल चाहता है,
वहीं इंसान तुझको छल रहा है,
निरंतर बातें दोनों कर रहे हैं,
इधर झगड़ा हमारा चल रहा है,
युगों से राम पूजे जा रहे हैं,
युगों से सिर्फ़ रावण जल रहा है,
समस्या को करो स्वीकार ढूँढो
उसी के संग उसका हल रहा है
बहुत मजबूर होता जा रहा हूँ
मैं ख़ुद से दूर होता जा रहा हूँ
उदासी दोस्त होती जा रही है
बहुत मशहूर होता जा रहा हूँ
तुम्हारे पास रहना चाहता हूँ
तुम्हीं से दूर होता जा रहा हूँ
मुसीबत साथ रहती है हमेशा
बहादुर शूर होता जा रहा हूँ
अँधेरा रास आने लग गया है
मैं अब बेनूर होता जा रहा हूँ
मिरी दौलत,मिरी शोहरत मेरा ईमान है साहब
तिरी ख़ातिर किताबें है मिरी तो जान है साहब
अभी है हिज्र का मौसम
अभी आँखें हैं भारी नम
फ़क़त है बेबसी बाक़ी
समेटे दिल में सारे ग़म
उदासी दोस्त होती है
कि जब होते हैं तन्हा हम
जो हरदम साथ होता है
वही होता नहीं हरदम
तुम्हीं हो ख़ास उसके बस
ये है दावा तुम्हारा भ्रम
है जिसके पास में सबकुछ
है उसके पास सबसे कम
तुम्हारे साथ यदि तुम ख़ुद खड़े हो
यक़ीं मानों कि तुम सबसे बड़े हो
विजेता माने जाओगे सदा ही
अगर तुम आख़िरी दम तक लड़े हो