अभी है हिज्र का मौसम
अभी आँखें हैं भारी नम
फ़क़त है बेबसी बाक़ी
समेटे दिल में सारे ग़म
उदासी दोस्त होती है
कि जब होते हैं तन्हा हम
जो हरदम साथ होता है
वही होता नहीं हरदम
तुम्हीं हो ख़ास उस के बस
ये है दावा तुम्हारा भ्रम
है जिस के पास में सब कुछ
है उस के पास सब से कम
— SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"















