हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझेअपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझेतू ईद है और तू ही दीवाली मेरीमैं हर बरस यूँही मनाऊँगा तुझे— Krishnakant Kabk