ये तेरी दिल-फ़रोज़ बातें ये तेरे उल्फ़त के वादे
हसीन होती ये ज़िंदगी अगर तुझ पे ऐतिबार होता
ये इशरत-ए-दीद शराब सी है पर दीद तेरी उधार सी है
कि फेर लेते तुझ से नज़रें गर इन पे इख़्तियार होता
तेरी चाहत की चाहत में हम सब कुछ भूले बैठे हैं
ऐ काश तुझ से न प्यार होता न प्यार का इंतिज़ार होता
ये सोहबत की रुसवाई है गर क़ुर्बत में तन्हाई है
जो दरमियाँ न दीवार होता हाल-ए-दिल आश्कार होता
यूँ जीना तो दुश्वार है ये पर क्या कीजे कि प्यार है ये
हाँ गर तू ग़म-गुसार होता तो ये दिल ख़ुश-गवार होता
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मैं क्या कुछ कह दूँ उस इक आन की नज़ाकत पे
झुकती हैं उन की नज़रें जब मुझ को पुकार के
ये साज़-ए-लब हैं उन के या है शीत रागिनी
छू कर जो ऐसे गुज़रे हैं ये धुन सितार के
आहा वो क्या शब वो मंज़र वो रंग-ए-अंदाज़
यूँ देखे हैं जब वो मुझ को गेसू सँवार के
है ये उन का वा'दा आएँगे आज नींद में
पर सोने की फ़ुर्सत तो दें ये दिन ख़ुमार के
या रब लिख दे उन की क़ुर्बत मेरे नसीब में
मुश्किल है जीना ऐसे तस्वीरें निहार के
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नहीं रुक रहे हैं ये आँसू तुम्हारे
लो ऐसा करो तुम मुझे भी रुला दो
बिना तुम को देखे जी लगता नहीं है
सो रुख़ से तुम अपने ये पर्दा हटा दो
सताता है मुझ को तग़ाफ़ुल तुम्हारा
मुझे बेरुख़ी का सबब तुम बता दो
ये चाहत है ऐसी कि सब कुछ लुटा दूँ
सुनो मेरी चाहत का कुछ तो सिला दो
कि करनी हैं बातें लबों को लबों से
चलो जान-ए-जाँ अब ये दूरी मिटा दो
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बा'द मुद्दत के झुकीं हैं पलकें उन की
देखो शायद कुछ तो कहना चाहते हैं
देखो शायद कुछ तो कहना चाहते हैं
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अब चैन इस दिल को मिले कैसे
रोज़ एक हसरत जाग जाती है
रोज़ एक हसरत जाग जाती है
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रख दे जो हाथ दिल पे तो शायद चैन आ जाए
नादाँ मेरे दिल तक कोई दवा नहीं जाती
नादाँ मेरे दिल तक कोई दवा नहीं जाती
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उन से करने गए इश्क़ के मसअलों के हिसाब
हँस के कहने लगे आप को नींद तो आती है
हँस के कहने लगे आप को नींद तो आती है
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इक अधूरी कहानी जिए जा रहे हैं
ज़ख़्म को ज़ख़्म से हम सिए जा रहे हैं
ज़ख़्म को ज़ख़्म से हम सिए जा रहे हैं
जिस सबास ब-ज़ाहिर अदावत है हम को
हम ये साँसें उसी की लिए जा रहे हैं
दो दिनों के त’अल्लुक़ ने नींदें उड़ा दीं
अब जगे जा रहे हैं जिए जा रहे हैं
रंज-ओ-ग़म में थी माँगी दवा हम ने उन से
बेरुख़ी बेरुख़ी बस दिए जा रहे हैं
हम समझते थे आक़िल कभी ख़ुद को जानाँ
अब भला हम ये क्या-क्या किए जा रहे हैं
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