jab dekha unki aankhoñ men mausam bahaar ke | जब देखा उनकी आँखों में मौसम बहार के

  - Prakash Pandey

जब देखा उनकी आँखों में मौसम बहार के
शौक़-ए-दिल ये रुख़ देखूँ काग़ज़ पे उतार के

मैं क्या कुछ कह दूँ उस इक आन की नज़ाकत पे
झुकती हैं उनकी नज़रें जब मुझको पुकार के

ये साज़-ए-लब हैं उनके या है शीत रागिनी
छू कर जो ऐसे गुज़रे हैं ये धुन सितार के

आहा वो क्या शब वो मंज़र वो रंग-ए-अंदाज़
यूँँ देखे हैं जब वो मुझ को गेसू सँवार के

है ये उनका वा'दा आएँगे आज नींद में
पर सोने की फ़ुर्सत तो दें ये दिन ख़ुमार के

या रब लिख दे उनकी क़ुर्बत मेरे नसीब में
मुश्किल है जीना ऐसे तस्वीरें निहार के

  - Prakash Pandey

Neend Shayari

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