dastoor-e-ishq men gar ham pe dil teraa bhi nisaar hota | दस्तूर-ए-इश्क़ में गर हम पे दिल तेरा भी निसार होता

  - Prakash Pandey

दस्तूर-ए-इश्क़ में गर हम पे दिल तेरा भी निसार होता
तो नींद की इनायत होती और आँखों में क़रार होता

ये तेरी दिल-फ़रोज़ बातें ये तेरे उल्फ़त के वादे
हसीन होती ये ज़िंदगी अगर तुझ पे ऐतबार होता

ये इशरत-ए-दीद शराब सी है पर दीद तेरी उधार सी है
कि फेर लेते तुझ से नज़रें गर इन पे इख़्तियार होता

तेरी चाहत की चाहत में हम सब कुछ भूले बैठे हैं
ऐ काश तुझ से न प्यार होता न प्यार का इंतिज़ार होता

ये सोहबत की रुसवाई है गर क़ुर्बत में तन्हाई है
जो दरमियाँ न दीवार होता हाल-ए-दिल आश्कार होता

यूँँ जीना तो दुश्वार है ये पर क्या कीजे कि प्यार है ये
हाँ गर तू ग़म-गुसार होता तो ये दिल ख़ुश-गवार होता

  - Prakash Pandey

Nasha Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Prakash Pandey

As you were reading Shayari by Prakash Pandey

Similar Writers

our suggestion based on Prakash Pandey

Similar Moods

As you were reading Nasha Shayari Shayari